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फरीसी और चुंगी लेनावाला

एक फरीसी और चुंगी लेनावाला मंदिर में प्रार्थना करते हैं।
CC BY-SA
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यीशु कुछ घमण्डी लोगों के साथ थे जो सोचते थे कि परमेश्वर उनके भले कामों और उनके जीने के तरीके से प्रभावित हैं। सो यीशु ने उन्हें यह दृष्टान्त कहा... – स्लाइड 1
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'दो आदमी मंदिर में प्रार्थना करने गए। एक फरीसी था, और दूसरा एक तिरस्कृत चुंग लेनेवाला था। – स्लाइड 2
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फरीसी ने स्वयं खड़े होकर यह प्रार्थना की: “परमेश्‍वर, मैं तेरा धन्यवाद करता हूँ, कि मैं औरों के समान पापी नहीं हूँ। क्योंकि मैं ने कपट नहीं किया, मैं ने पाप नहीं किया, और मैं ने व्यभिचार नहीं किया। – स्लाइड 3
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और न इस चुंगी लेने वाले के समान हूं। मैं सप्ताह में दो बार उपवास करता हूं, मैं अपनी सब कमाई का दसवां अंश भी देता हूं। – स्लाइड 4
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परन्तु चुंगी लेने वाले ने दूर खड़े होकर, स्वर्ग की ओर आंखे उठाना भी न चाहा, वरन अपनी छाती पीट-पीटकर कहा है परमेश्वर मुझ पापी पर दया कर। – स्लाइड 5
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फिर यीशु ने समझाया, 'चुंगी लेनेवाला धर्मी ठहराया जाकर अपने घर लौटा न कि फरीसी। जो कोई अपने आप को बड़ा बनाएगा, वह छोटा किया जाएगा, और जो अपने आप को छोटा बनाएगा, वह ऊंचा किया जाएगा। – स्लाइड 6
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