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बालक मूसा

मूसा को फिरौन की मौत की सजा से बचाया गया।
CC BY-SA
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निर्गमन 1:8 मिस्र में नया फिरौन राज्य करने लगा वहाँ इस्राएली भी रहते थे। वह युसूफ के बारे में नहीं जानता था। – स्लाइड 1
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जब उसने देखा कि इस्राएली संख्या में बहुत हैं, तो वह उनकी शक्ति से डर गया। – स्लाइड 2
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निर्गमन 1:9-10 उसने अपने लोगों को चेतावनी दी कि यदि युद्ध हुआ तो इस्राएली अपने शत्रुओं का पक्ष ले सकते हैं और फिर देश छोड़ सकते हैं। – स्लाइड 3
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निर्गमन 1:11 इसलिए मिस्रियों ने इस्राएलियों को गुलाम बनने के लिए मजबूर कर दिया। – स्लाइड 4
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उनके सरदारों ने उनसे रामसेस और पिथोम नामक नगर बनवाए। – स्लाइड 5
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निर्गमन 1:12-13 लेकिन इस्राएली उन पर हो रहे अत्याचारों के बाद भी संख्या और बल में बढ़ते चले गए और बहुत हो गए। – स्लाइड 6
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निर्गमन 1:14 इसलिए मिस्रियों ने उनसे और अधिक क्रूरता से काम लेना चालू कर दिया – स्लाइड 7
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निर्गमन 1:15 इब्री स्त्रियों को बच्चे के जन्म में सहायता करने वाली दो धाईया थी उनके नाम शिप्रा और पूआ थे। – स्लाइड 8
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निर्गमन 1:16 फिरौन ने उन्हें बुलाकर आज्ञा दी, कि यदि कोई इब्री स्त्री लड़के को जन्म दे, तो वे उसे मार डालें। अगर बच्चा लड़की हो तो ही वे उसे जीवित रहने दे सकते थे। – स्लाइड 9
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निर्गमन 1:17 लेकिन धाईयों ने फिरौन के बजाए परमेश्वर की आज्ञा माना और बच्चों को जीवित रहने दिया। – स्लाइड 10
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निर्गमन 1:18-19 फिरौन ने उन्हें बुलाकर उनसे पूछा कि उन्होंने बालकों कों क्यों नहीं मारा। उन्होंने बहाना बनाते हुए कहा कि उनके पहुंचने से पहले ही इब्री स्त्रियां बालको को जन्म दे चुकी होती थी। – स्लाइड 11
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निर्गमन 1:22 इसलिए फिरौन ने मिस्रियों को आज्ञा दी कि जो भी बालक किसी इब्री के घर में जन्म ले उसे नील नदी मे फिंकवा दिया जाए। – स्लाइड 12
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निर्गमन 2:1 जब लेवी के गोत्र के एक इब्री पुरुष और पत्नी के एक बच्चा हुआ तो उन्होंने उसे मिस्रियों से तीन महीने तक छिपा रखा। – स्लाइड 13
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निर्गमन 2:2 लेकिन जैसे-जैसे बच्चा बड़ा होता गया उसे छुपा कर रखना मुश्किल हो गया। – स्लाइड 14
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निर्गमन 2:3 इसलिए उसकी मां ने अपने बच्चे को नजरों से दूर रखने के लिए एक तरकीब निकाली। उसने सरकंड़ों के पत्तों से एक टोकरी बनवाई और उसे जलरोधक बनाने के लिए तारकोल और पिचकारी से ढक दिया। – स्लाइड 15
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उसने बच्चे को टोकरी में रखा और उसे नील नदी में ले गई। उनकी छोटी बेटी मिरियम ने उनकी मदद की। – स्लाइड 16
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निर्गमन 2:4 उसने टोकरी को नदी के किनारे लम्बे झाड़ों में छिपा दिया। मिरियम दूर से बच्चे को देखती रही। – स्लाइड 17
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निर्गमन 2:5 अप्रत्याशित रूप से फिरौन की बेटी स्नान करने के लिए नदी पर उतर आई। उसने टोकरी देखी और अपने एक परिचारक को उसे लाने के लिए भेजा। – स्लाइड 18
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निर्गमन 2:6 जब उसने टोकरी खोली और देखा कि बच्चा रो रहा है तो उसे उस पर तरस आया। 'यह हिब्रू बच्चों में से एक है,' उसने कहा। – स्लाइड 19
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निर्गमन 2:7 मिरियम, जो देख रही थी, राजकुमारी के पास आई। 'क्या मैं जाकर किसी इब्री महिला को आपके लिए बच्चे को दूध पिलाने के लिए ले आऊं?' उसने पूछा। 'हाँ,' राजकुमारी ने उत्तर दिया। – स्लाइड 20
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मिरियम अपनी माँ को लेने के लिए दौड़ी। 'इस बच्चे को ले जाओ और इसे मेरे लिए दूध पिलाओ, और मैं तुम्हें भुगतान कर दूंगी,' राजकुमारी ने कहा। – स्लाइड 21
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इसलिए माँ ने अपने बच्चे की तब तक देखभाल की जब तक कि वह इतना बड़ा नहीं हो गया कि उसे राजकुमारी के पास ले जाया जाए जहाँ उसे अपने बेटे के रूप में पाला गया। – स्लाइड 22
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उसने उसका नाम मूसा रखा (जिसका मिस्र की भाषा मे अर्थ है,बाहर निकालना)। 'मैंने इस पानी में से बाहर निकाला है, उसने सबसे कहा।’ – स्लाइड 23
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